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कविता शीर्षक-  भारत की एकता…!📚

(प्रजासत्ताक दिन विशेषांक)

कविता शीर्षक-

भारत की एकता…!📚

देश मे एकता बनाये रखने के लिये सभी को यही है कहना,

मैं तुम्हारे विचारो का सम्मान करुंगा,

तुम मेरे विचारो का सम्मान करना..!

गाव से शहर तक,

शहर से देश का विकास हमे ही है करना,

आपस मे, पडोस मे मिल-जुलकर हमे ही है रहना,

तो किसी और के कहने पर क्यू आपस मे लडना ?

मैं तुम्हारे विचारो का सम्मान करुंगा,

तुम मेरे विचारो का सम्मान करना..!

हम इस देश के वासी है,

हमे इसी देश मे है रहना,

इस देश के सम्मान के लिये

हमे ही है देश को विकसित करना,

तो किसी और के भडकाने से क्यू अपना देश जलाना ?

मैं तुम्हारे विचारो का सम्मान करुंगा,

तुम मेरे विचारो का सम्मान करना..!

जात-पात-धर्म-वंश से नही

इन्सानियत से जुडा मजहब हमारा,

मैं इबादत मे साथ दूंगा तुम्हारा

तुम पूजा मे साथ देना हमारा,

तो किसी और के बहकाने से क्यू अपना भविष्य बिगाडना ?

मैं तुम्हारे विचारो का सम्मान करुंगा,

तुम मेरे विचारो का सम्मान करना..!

 

ये देश सिर्फ एक देश नही, घर है हमारा

इस देश के लोग सिर्फ लोग नही, परिवार है हमारा

यु तो परिवारो मे होती है नोकझोक कई

इस वजह से हमे हमारा घर थोडी है जलाना…!

 

इसीलिये मैं कहता हू,

देश मे एकता बनाये रखने के लिये सभीको यही है कहना,

मै तुम्हारे विचारो का सन्मान करुंगा,

तुम मेरे विचारो का सन्मान करना..!

-हर्षल देविदास कापुरे (प्रा.शिक्षक)एन.डी.मराठे शैक्षणिक संकुल, शिंदखेडा ता.शिंदखेडा जि.धुळे .9767524172

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